नए साल पर मुख्यमंत्री धामी का बागेश्वर को तोहफा, 81 करोड़ की 26 योजना का किया शिलान्यास

bikram

निवेशक शिखर सम्मेलन के बाद मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी रोड शो करने और राज्य के विकास के लिए नीतियों को बढ़ावा देने में व्यस्त हैं। कुछ दिन पहले उन्होंने मंगलवार को बागेश्वर जिले के कपकोट विकासखंड के केदारेश्वर मैदान में आयोजित (चेलि बवार्युं कौतिक) मातृशक्ति उत्सव कार्यक्रम में हिस्सा लिया था।

बागनाथ मंदिर बागेश्वर में 90 मूर्तियों की होगी स्थापना

इस अवसर पर उन्होंने विभिन्न विभागों की लगभग 100 करोड़ रुपये की विकास योजनाओं का उद्घाटन एवं शिलान्यास किया. जिसमें 19 करोड़ रुपये की 11 विभिन्न योजनाओं का उद्घाटन और 81 करोड़ रुपये की 26 योजनाओं का शिलान्यास शामिल है। कार्यक्रम को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि बागेश्वर जिले में नशा मुक्ति केंद्र की स्थापना, बागनाथ मंदिर बागेश्वर के संग्रहालय में 90 मूर्तियों की स्थापना, बदियाकोट कर्मी तलाई में 100 मीट्रिक टन की स्थापना की जायेगी।

उन्होंने गोदाम एवं आवासीय भवन के निर्माण, विधानसभा क्षेत्र कपकोट के सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र को अतिरिक्त जिला अस्पताल बनाने, बागेश्वर जिले के भरारी में मल्टी पार्किंग के साथ शामा में मल्टी लेवल पार्किंग के निर्माण से संबंधित प्रस्तावों को मंजूरी देने की घोषणा की।

उन्होंने सरयू के उद्गम स्थल को पर्यटन स्थल के रूप में विकसित करने की भी घोषणा की। कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री ने विभिन्न विभागों एवं स्वयं सहायता समूहों द्वारा लगाये गये स्टालों का अवलोकन किया। उन्होंने विभिन्न घाटियों में निर्मित हस्तशिल्प और हस्तशिल्प उत्पादों की भी सराहना की। मुख्यमंत्री ने स्वयं भी तांबे के बर्तनों और रिंगाल की टोकरियों में कलाकृतियाँ बनाईं।

उन्होंने सशक्त मातृशक्ति, सशक्त उत्तराखंड नारे के तहत मातृशक्ति का पूजन कर शहीदों की वीरांगनाओं का सम्मान भी किया। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि उत्तराखंड की सदैव सराहना की जाती है। उत्तराखंड राज्य के निर्माण में मातृशक्ति के योगदान को भुलाया नहीं जा सकता। मातृशक्ति अपने परिवार के साथ-साथ समाज एवं राज्य के हितों का भी ध्यान रखती है।

किसी समाज या राष्ट्र का सर्वांगीण विकास मातृशक्ति के सहयोग से ही संभव है। यदि किसी राष्ट्र की मातृशक्ति शिक्षित होती है तो उस राष्ट्र का वर्तमान और भविष्य सुरक्षित रहता है। बेटियां अपने ज्ञान से दो-दो घरों को रोशन करती हैं।

वह याद दिलाते हैं कि भारतीय संस्कृति में ‘कन्यादान’ करना सबसे बड़ा पुण्य माना जाता है, लेकिन हम सभी को ‘कन्यादान’ से पहले ‘विद्या दान’ भी करना चाहिए। मुख्यमंत्री ने कहा कि इस कार्यक्रम में विभिन्न महिला समूहों द्वारा लगाये गये स्टॉल एवं प्रदर्शित उत्पाद प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी द्वारा दिये गये ”आत्मनिर्भर भारत” के मंत्र को चरितार्थ करने का कार्य कर रहे हैं।

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