दिल्ली में उत्तराखंड की बेटी को मिला राष्ट्रीय सम्मान, श्रीनगर की 7 साल कि समायरा को मिला राष्ट्रीय रत्न

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देवभूमि उत्तराखंड की प्रतिभावान बेटियां हर कोने में अपनी प्रतिभा दिखा रही हैं। यह न केवल राज्य को बल्कि विदेशों को भी गौरवान्वित कर रहा है। आज हम आपको एक और बेटी से मिलवाने जा रहे हैं जिसे 8 दिसंबर को राष्ट्रीय रत्न पुरस्कार से सम्मानित किया गया।

7 साल की उम्र में बना डाले कई रेकॉर्ड

लड़की का नाम समायरा रावत है, जो मूल रूप से श्रीनगर पौडी गढ़वाल की रहने वाली है, हाल ही में उन्हें 8 दिसंबर को दिल्ली के एम्पावर्ड वुमेन एंड अचीवर्स फाउंडेशन द्वारा आयोजित 17वें राष्ट्रीय पुरस्कार समारोह में राष्ट्रीय रत्न पुरस्कार से सम्मानित किया गया था।

जबकि समायरा रावत के पिता पंकज रावत, जो सेना में एक डेकोरेटेड ऑफिसर हैं। उनमें बहुमुखी प्रतिभा का धनी है, वह भारतीय सेना में कर्नल हैं, उनकी मां सारिका रावत एक ग्राफिक डिजाइनर हैं। आपको बता दें कि समायरा एक जिला स्तरीय शतरंज चैंपियन की उपविजेता हैं।

शिक्षा और खेल की दुनिया में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने के अलावा, उनकी प्रतिभा मनोरंजन उद्योग तक फैली हुई है। जहां उन्होंने हॉपस्कॉच, फ्लिपकार्ट आदि ब्रांडों के साथ विज्ञापनों और प्रिंट शूट में काम किया है।

समायरा को कई पुरस्कार मिल चुके हैं, जिसके बारे में उनकी मां सारिका ने बताया कि अब तक उन्हें निम्नलिखित पुरस्कार मिल चुके हैं।

  • राष्ट्रीय रतन पुरस्कार शामिल है
  • नवभारत ज्ञानपीठ पुरस्कार
  • भारतीय कला रतन उत्कृष्टता पुरस्कार
  • अंतर्राष्ट्रीय रूप कथा पुरस्कार
  • होप फाउंडेशन द्वारा

चैंपियंस ऑफ चेंज अवार्डइसके साथ ही उन्होंने साल 2018 में टैलेंट हंट भी जीता है और प्रियदर्शिनी जेसीआई अवॉर्ड भी हासिल किया है। इसके अलावा समायरा ने कई रिकॉर्ड भी अपने नाम किए हैं जैसे वह दिल्ली बुक ऑफ रिकॉर्ड्स, स्टेट बुक ऑफ रिकॉर्ड्स और जैकी इंटरनेशनल बुक ऑफ रिकॉर्ड्स बनाने में सफल रहीं।

उन्होंने बताया कि उनके पति कर्नल पंकज रावत वर्तमान में जम्मू-कश्मीर में तैनात हैं। जिसके चलते समायरा भी अपनी शिक्षा जम्मू-कश्मीर से प्राप्त कर रही हैं। वह यहां सातवीं कक्षा की छात्रा है। उन्होंने बताया कि समायरा की परीक्षाएं 4 दिसंबर से 9 दिसंबर तक चल रही थीं, जिसके कारण वह 8 दिसंबर को दिल्ली में होने वाले कार्यक्रम में शामिल नहीं हो सकीं. उनकी ओर से उनके चचेरे भाई ने पुरस्कार लिया।

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