उत्तराखंड में स्वरोजगार की ओर बढ़ रहे युवा, हल्द्वानी में युवती ने शुरू किया ससबनी ग्राम्य हाट को देश में मिल रही पहचान

bikram

आज उत्तराखंड राज्य विश्व पटल पर अपनी पहचान बना रहा है, यहां का हर व्यक्ति चाहे वह किसी भी क्षेत्र में हो, अपनी पहचान बना रहा है और भारत का नाम रोशन कर रहा है। उत्तराखंड अब न केवल अपनी सुंदरता के लिए बल्कि अपनी वनस्पति और प्राकृतिक संपदा के लिए भी याद किया जाता है। हिमालय क्षेत्र में होने के कारण उत्तराखंड राज्य कई लाभकारी फलों, फूलों और जड़ी-बूटियों से समृद्ध है।

वकालत की पढ़ाई कर गओ वापस आई नेहा ने खोल डाटा अपना स्टार्ट उप

यहां उगने वाले फल, फूल, जड़ी-बूटियां और सब्जियों की मांग पूरे देश विदेश में है। उत्तराखंड के इन उत्पादों का उपयोग न केवल भारत में बल्कि विदेशों में भी किया जाता है और उत्तराखंड की समृद्धि ने न केवल वैश्विक स्तर पर अपनी पहचान बनाई है बल्कि यहां के युवाओं को रोजगार भी प्रदान किया है। आज उत्तराखंड के कई युवा कृषि उत्पादों के माध्यम से स्वरोजगार की राह पर चल पड़े हैं।

ऐसी ही एक युवा हैं नैनीताल जिले की रहने वाली नेहा साह। नैनीताल से लगभग 52 किलोमीटर की दूरी पर स्थित ग्राम सभा सासबनी की रहने वाली नेहा अपने गांव में पैदा होने वाले फलों और मसालों से कृषि उत्पाद बनाने के लिए प्राकृतिक जड़ी-बूटियों और फलों का उपयोग कर रही हैं। इतना ही नहीं, नेहा अब इन प्रोडक्ट्स को देश के कोने-कोने में पहुंचा रही हैं।

उन्होंने अपने कृषि उत्पादों के ब्रांड का नाम अपने गांव के नाम पर रखा है। नेहा साह द्वारा निर्मित किये जा रहे ये कृषि उत्पाद बाजार में ‘ससबनी ग्राम्य हाट’ के नाम से प्रसिद्ध हैं। नेहा का कहना है कि उनका मुख्य उद्देश्य उत्तराखंड के फलों और मसालों का स्वाद देश के कोने-कोने तक पहुंचाना है।

नेहा द्वारा बनाये जा रहे उत्पादों में प्रिजर्वेटिव, जैम, फलों का मुरब्बा, पहाड़ी मसाले, विभिन्न प्रकार के फलों के जूस, पहाड़ी दालें, हर्बल चाय, मंडुवे से बने उत्पाद, पहाड़ी नून जैसे कई तरह के उत्पाद शामिल हैं। नैनीताल जिले की रहने वाली नेहा ने कानून में स्नातक की पढ़ाई पूरी की है।

नेहा ने बताया कि शादी के बाद जब वह अपने परिवार के साथ पहाड़ों पर गईं तो उन्हें पहाड़ी जीवन और संस्कृति को करीब से अनुभव करने का मौका मिला। पहाड़ के लोगों की सादगी और यहां की वन संपदा पर निर्भर उनके जीवन को देखकर नेहा ने स्वरोजगार की राह पर चलने का फैसला किया।

पहले भी उनकी इच्छा थी कि पहाड़ से जुड़ा कोई काम शुरू किया जाए, जिसे अब पहाड़ी माहौल में पंख लग गए हैं। इसके बाद नेहा ने करीब डेढ़ साल पहले अपना ब्रांड शुरू किया और पहाड़ी उत्पादों से एग्रो प्रोडक्ट बनाकर उसका स्वाद लोगों तक पहुंचाया। अपने गांव को एक अलग पहचान दिलाने के लिए उन्होंने अपने गांव सासबनी के नाम से अपना ब्रांड ‘सासबनी ग्राम्य हाट’ शुरू किया। यह नेहा साहा की सफलता की कहानी है, जिन्होंने अपना नाम बनाने के लिए पर्यावरण को चुना।

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