उत्तराखंड की “मंगल गर्ल” नंदा सटी ने किया कमाल, 20 साल की उम्र में मंगल गीत गाकर जीता राष्ट्रपति से गोल्ड

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उत्तराखंड एक ऐसी भूमि है जो संस्कृति से समृद्ध है। यहां अलग-अलग तरह के लोगों के कई रीति-रिवाज होते हैं। ये रीति-रिवाज और संस्कृति इतनी विविधतापूर्ण हैं कि इन्हें किसी भी कीमत पर बचाना होगा, उत्तराखंड के लोक संगीत और परंपराओं को बचाने के लिए युवाओं को इस दिशा में कदम उठाना होगा।

राष्ट्रपति मुर्मू द्वारा मास्टर ऑफ आर्ट्स (संगीत विषय) में स्वर्ण पदक

आज के समय में जब युवा अपनी संस्कृति से विमुख होते जा रहे हैं, ऐसे में नंदा सती जैसी पहाड़ की बेटियां उम्मीद जगाने का काम कर रही हैं। नंदा सती गढ़वाल विश्वविद्यालय की छात्रा हैं, जिन्होंने पारंपरिक मांगल गीतों को नई पहचान दिलाने का सराहनीय काम किया है।

आज हम बात कर रहे हैं उत्तराखंड की होनहार बेटी नंदा सती के बारे में, उन्होंने अब संगीत के क्षेत्र में गोल्ड मेडल प्राप्त किया है। हम आपको बताना चाहते हैं कि नंदा सती को महामहिम राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू द्वारा मास्टर ऑफ आर्ट्स (संगीत विषय) में स्वर्ण पदक से सम्मानित किया गया था। नंदा सती अभी सिर्फ 22 साल की हैं, लेकिन इतनी कम उम्र में मां सरस्वती के आशीर्वाद से उन्होंने जो काम किया है, उसकी हर कोई सराहना कर रहा है।

उनके गाए मंगल गीत और लोकगीत सुनकर हर कोई उनसे प्रभावित होकर आश्चर्यचकित हो जाता है। मांगल गीत प्रस्तुत करते समय उनकी जादुई आवाज और हारमोनियम पर थिरकती अंगुलियां लोगों को झूमने पर मजबूर कर देती हैं. नंदा सती को लोग मंगल गर्ल के नाम से जानते हैं। मंगल गीत गाने के साथ-साथ नंदा हारमोनियम बजाने में भी माहिर हैं।

जिस उम्र में युवा पीढ़ी मोबाइल, रील्स और सोशल मीडिया से आगे नहीं देख पा रही है. उत्तराखंड की यह होनहार बेटी नंदा उत्तराखंड के मांगल गीतों को संरक्षित करने का प्रयास कर रही है। अपनी लोक संस्कृति से प्रेम करने वाली नंदा अन्य युवाओं के लिए मिसाल बन गई हैं। राज्य समीक्षा टीम नंदा सती जैसी बेटियों को सलाम करती है।

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