चीन को नाकाम करने के लिए अब उत्तराखंड के दारमा और व्यास घाटी में बनेंगे वाइब्रेंट विलेज, आदि कैलाश के लिए उमड़ रही भीड़

bikram

चीन की चालों को नाकाम करने के लिए मोदी सरकार हर वो जरूरी कदम उठा रही है जो उठाया जाना जरूरी है. हाल ही में उत्तराखंड में भी वास्तविक नियंत्रण रेखा यानी एलएसी पर स्थित गांवों को तकनीकी रूप से विकसित करने का निर्णय लिया गया है। इसके लिए एक खास योजना भी तैयार की गई है जिसे वाइब्रेंट विलेज प्रोग्राम कहा जा रहा है।

सरकार 10 करोड़ रुपये की लागत से चीन सीमा से लगे दारमा और व्यास घाटी के 21 गांवों को पूरी तरह से विकसित करने की योजना बना रही है। इस कार्यक्रम के लिए केएमवीएन की ओर से योजना तैयार कर ली गई है, जिसे जल्द ही शासन को भेजा जाएगा।आपको बता दें कि इस कार्यक्रम के लिए सबसे पहले उत्तराखंड में नेपाल सीमा से लगे सीमांत गांव कुंजी को चुना गया था। गुंजी के बाद अब दारमा और व्यास घाटी के सभी गांवों को भी इसमें शामिल कर लिया गया है।

प्रधानमंत्री मोदी के दौरे ने बढ़ाई कुमाऊं में विकास की उम्मीद

हाल ही में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के व्यास घाटी स्थित आदि कैलाश के दौरे से इन गांवों के विकास की उम्मीद बढ़ी है, जिससे लोगों को पर्यटन विभाग से प्रस्ताव तैयार करने की उम्मीद बढ़ी है.केएमवीएन के जेई गिरीश चंद्र भट्ट ने बताया कि पर्यटन को ध्यान में रखते हुए दारमा और व्यास घाटी में ट्रेक रूट बनाए जाएंगे। नाभी और कुटी गांव में पर्यटकों के लिए सूचना केंद्र बनाए जाएंगे। आपदा से निपटने के लिए व्यास घाटी के गुंजी और दारमा घाटी में रेस्क्यू सेंटर बनाए जाएंगे।

आपको बता दें कि चीन सीमा के पास व्यास घाटी के पहले गांव गुंजी में पहले से ही केएमवीएन के पर्यटक आवास गृह मौजूद हैं. गुंजी वाइब्रेंट विलेज के लिए चयनित पहला गांव भी है। अब वाइब्रेट विलेज प्रोग्राम के तहत प्रस्तावित योजना के तहत केएमवीएन द्वारा गुंजी में करीब 3-4 करोड़ रुपये की लागत से 15 से 20 कमरों का पर्यटक आवास गृह बनाया जाएगा। यह पर्यटक आवास गृह आधुनिक सुविधाओं से सुसज्जित होगा।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की आदि कैलाश यात्रा के बाद इस क्षेत्र में आदि कैलाश के लिए पर्यटन गतिविधियों में बढ़ोतरी देखी गई है। आदि कैलाश के दर्शन के लिए न केवल स्थानीय बल्कि देशी-विदेशी पर्यटक भी आ रहे हैं। आपको बता दें कि अब तक 7000 तीर्थयात्री आदि कैलाश के दर्शन कर चुके हैं और इस यात्रा के लिए हर दिन करीब 50 से 60 तीर्थयात्रियों के इनर लाइन पास बनाए जा रहे हैं. मोदी सरकार के इस वाइब्रेंट विलेज प्रोग्राम से इन पर्यटन गतिविधियों में और बढ़ोतरी की संभावनाएं हैं।

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