बंद हुए फ्यूला नारायण मंदिर के कपाट, चमोली का वो मंदिर जो खुलता है सिर्फ डेढ़ महीने और देता है समाज की कुरीतियों को चुनौतियाँ

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जोशीमठ विकासखंड के उर्गम घाटी में स्थित चमोली जिले का खूबसूरत मंदिर फ्यूला नारायण मंदिर अब रविवार को विधि-विधान और पूजा-अर्चना के साथ शीतकाल के लिए बंद कर दिया गया है। उर्गम घाटी के भर्की गांव क्षेत्र में जंगलों के बीच स्थित भगवान विष्णु का एक मंदिर है जिसे फ्यूला नारायण धाम के नाम से जाना जाता है। रविवार दोपहर 2:30 बजे भगवान नारायण के कपाट शीतकाल के लिए बंद कर दिए गए। रविवार सुबह पुजारी अबल सिंह पंवार ने बालभोग और राजभोग का भोग लगाकर कपाट बंद करने की प्रक्रिया शुरू की, जिसके बाद विशेष पूजा-अर्चना के बाद दोपहर 2:30 बजे फूंलानारायण मंदिर के कपाट विधि-विधान से बंद कर दिए गए।

उत्तराखंड का ऐसा मंदिर जहां महिलाएं भी होती हैं पुजारी

इस दौरान सैकड़ों श्रद्धालुओं ने भगवान विष्णु की पूजा-अर्चना कर मनोकामना मांगी। इस अवसर पर चन्द्र मोहन सिंह पंवार, रमा देवी, मंजू देवी, रामचन्द्र सिंह, दर्शन सिंह रघुवीर सिंह चौहान सहित अनेक नागरिक उपस्थित थे। हिमालय के इस मंदिर की एक खास बात यह है कि इसके दरवाजे साल में केवल डेढ़ महीने के लिए खोले जाते हैं। जब दरवाजे बंद होते हैं तो कुंवारी कन्याएं भगवान नारायण को फूलों से सजाती हैं। इस मंदिर में पूजा करने का अधिकार ठाकुर जाति के पुजारियों को है।

फ्यूला नारायण एक ऐसा मंदिर है जहां एक पुरुष पुजारी के साथ एक महिला पुजारी को रखने का प्रावधान है। यहां महिला पुजारी भी पुरुष पुजारी के समान ही अनुष्ठान करती है। इस वर्ष इस मंदिर में पुरुष पुजारी के साथ-साथ महिला पुजारी की जिम्मेदारी देवी पार्वती को सौंपी गई है, जिन्हें फ़्यूल्याण के नाम से भी जाना जाता है। समुद्र तल से 10 हजार फीट की ऊंचाई पर स्थित फूला नारायण मंदिर पंच केदारों में से एक केदार कल्पनाथ मंदिर के शीर्ष पर स्थित है। क्षेत्र के भेटा, भर्की, पिलखी, गवाना और अरोसी गांव के लोग हर साल फ्यूला नारायण मंदिर में पूजा-अर्चना करते हैं। इस वर्ष इसकी जिम्मेदारी पुरुष पुजारी के रूप में गांव के अबल सिंह और महिला पुजारी के रूप में पार्वती देवी को सौंपी गई है।

साल में सिर्फ डेढ़ महीने के लिए खुलते इसके कपाट

9:30 बजे कपाट खुलने से पहले नवनियुक्त पुजारी को चिमटा व घंटी सौंपी गयी तथा महिला पुजारी को फूलदान व माखन से भरा बर्तन दिया गया। मंदिर में भंडारे का भी आयोजन किया गया। नंदा स्वानुल देवी के पुजारी अब्बल सिंह पंवार और मंगल सिंह चौहान ने विधि-विधान से मंदिर के कपाट खोलने की प्रक्रिया पूरी की। लक्ष्मण सिंह नेगी ने बताया कि पुरानी परंपरा के अनुसार फ़्यूला नारायण मंदिर से बद्रीनाथ तक पैदल मार्ग था। पहले यहां ध्यानबद्री में एक घराट (पनचक्की) हुआ करती थी जहां से बद्रीनाथ के लिए गेहूं पीसकर बकरियों के लिए भेजा जाता था। लेकिन जब से सड़क बनी है, यह सिलसिला लगभग खत्म हो गया है।

जब मंदिर के दरवाजे खुलते हैं तो भगवान नारायण के स्नान के बाद फ्यूंला को फूलों से सजाया जाता है। इससे पहले ग्रामीण अपनी गायों को लेकर फ्यूंला नारायण पहुंचते हैं और इन गायों का दूध और मक्खन भगवान को अर्पित किया जाता है। खास बात यह है कि यहां पुजारी की जगह महिलाएं भगवान का श्रृंगार करती हैं। जिसके बाद पुजारी, श्रृंगार करने वाली महिला और गाय कपाट बंद होने तक फ्यूंला नारायण मंदिर में ही रहते हैं।

फ्यूला नारायण मंदिर कैसे पहुँचें?

फ्यूला नारायण मंदिर उत्तराखंड के चमोली जिले में उर्गम घाटी में स्थित है। फ्यूला नारायण मंदिर तक केवल पैदल ही पहुंचा जा सकता है। आपको जोशीमठ तक अपना रास्ता तय करना होगा, जो देहरादून से लगभग 293 किमी की दूरी पर है। जोशीमठ से, हेलंग की ओर जाएं जो लगभग 22 किमी दूर है और अंत में हेलंग से 15 किमी दूर देवग्राम की ओर जाएं। फ्यूलानारायण मंदिर की पैदल यात्रा देवग्राम से शुरू होती है जो 12 से 15 किमी लंबी है।

फ्यूला नारायण मंदिर तक सड़क संपर्क: देवग्राम तक सड़क मार्ग हरिद्वार, देहरादून या ऋषिकेश से पहुंचा जा सकता है।

निकटतम हवाई अड्डा: फ्यूला नारायण मंदिर का निकटतम हवाई अड्डा देहरादून का जॉली ग्रांट हवाई अड्डा है, जो हेलंग (उर्गम रोड) से 265 किमी दूर स्थित है। वहां से आप अपने इच्छित स्थान तक पहुंचने के लिए हमेशा बस या टैक्सी ले सकते हैं।

  • दिल्ली से फ्यूला नारायण की दूरी: 470 K.M.
  • देहरादून से फ्यूला नारायण की दूरी: 280 K.M.
  • ऋषिकेश से फ्यूला नारायण की दूरी: 250 K.M.
  • हरिद्वार से फ्यूला नारायण की दूरी: 260 K.M.

निकटतम रेलवे स्टेशन: निकटतम रेलवे स्टेशन हरिद्वार रेलवे स्टेशन है, जो देवग्राम से 283 किमी दूर है, मंदिर तक की यात्रा देवग्राम से शुरू होती है।

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