उत्तराखंड में सुधरेगा हेमकुंड जाने का मार्ग, रोपवे के बाद अब पैदल मार्ग भी होगा 1.5 KM काम

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हेमकुंड की यात्रा उत्तराखंड और दुनिया की सबसे कठिन तीर्थयात्राओं में से एक है, फिर भी लोग यहां आने से खुद को रोक नहीं पाते हैं। तीर्थयात्री और साहसिक प्रेमी बड़ी संख्या में इस स्थान पर आ रहे हैं। सरकार भी अब यहां और भी ज्यादा योजना बना रही है। रोपवे की घोषणा के बाद पैदल रास्ता फिर आसान हो गया है। सरकार यात्रा में आने वाली परेशानी को दूर कर रही है और श्रद्धालुओं को करीब डेढ़ किमी कम चलना पड़ेगा। अब तक प्रतिदिन 800 से अधिक श्रद्धालु गुरुद्वारा श्री हेमकुंड साहिब पहुंच रहे हैं। दरअसल, अटलाकोटी और गुरुद्वारा श्री हेमकुंड साहिब के बीच 1160 सीढ़ियां क्षतिग्रस्त हो गई थीं। इन 1160 क्षतिग्रस्त सीढ़ियों की मरम्मत कर दी गई है। दरअसल, जब से बारिश कम हुई है, यात्रा की रफ्तार भी फिर से तेज हो गई है।

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बारिश की वजह से टूटी सीढियो को फिर बनाएगी राज्य सरकार

यात्रा सीजन अच्छा चल रहा था लेकिन बीच में जब बारिश तेज हो गई तो इसका पैदल मार्ग क्षतिग्रस्त हो गया, जिसे अब ठीक कर दिया गया है। पहले सर्दियों में घांघरिया से हेमकुंड के बीच पांच किमी पैदल मार्ग क्षतिग्रस्त हो गया था, जिसकी इन दिनों तेजी से मरम्मत की जा रही है। अटाला कोटी घांघरिया से दो किमी आगे है।

हम आपको बताना चाहते हैं कि यहां से हेमकुंड के लिए दो पैदल मार्ग हैं। पहला समतल है, जिसकी लंबाई तीन किमी है। दूसरा रास्ता सीढ़ियों वाला है, जिसमें डेढ़ किलोमीटर पैदल चलना पड़ता है। गुरुद्वारा श्री हेमकुंड साहिब मैनेजमेंट ट्रस्ट के मुख्य प्रबंधक सरदार सेवा सिंह ने बताया कि इस मार्ग पर 1160 सीढ़ियां हैं, जिनकी मरम्मत के बाद अधिकांश तीर्थयात्री इसी मार्ग से यात्रा कर रहे हैं।

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श्री हेमकुंड साहिब के कपाट बंद होने की तारीखों का ऐलान हो गया है. श्री हेमकुंड साहिब के कपाट 11 अक्टूबर को दोपहर 1 बजे बंद किये जायेंगे. इसके साथ ही 2023 की हेमकुंड साहिब यात्रा भी समाप्त हो जाएगी. श्री हेमकुंड साहिब गुरुद्वारा प्रबंधन ट्रस्ट कमेटी के अध्यक्ष सरदार नरेंद्रजीत सिंह बिंद्रा ने यह जानकारी देते हुए बताया कि ट्रस्टियों की बैठक में यह निर्णय लिया गया। अब तक डेढ़ लाख से ज्यादा श्रद्धालु हेमकुंड साहिब के दर्शन कर चुके हैं।

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